Monthly Archives: February 2013

श्री रतन सिंह राठौड़ : समाज सेवी व व्यवसायी

Ratan Singh Rathore

श्री रतन सिंह राठौड़ का जन्म २ जुलाई १९६६ में ग्राम तुरा तहसील सायला, जिला जालौर में ठाकुर मोतीसिंह जी की ठकुरानी हंसकँवर की कोख से हुआ| आपने अपने गांव तुरा से प्राथमिक शिक्षा लेने के तत्पश्चात आगे की शिक्षा मालगांव में अर्जित की व उससे आगे की शिक्षा मुंबई में अपने मामोसा के पास रहते हुए पुरी की|

शिक्षा पुरी करने के बाद आपने एक राजस्थानी सेठ के यहाँ २००० रु. प्रति माह के वेतन पर अपने कैरियर की शुरुआत की और नौकरी करते हुए आपने अपनी लगन व परिश्रम से व्यापार की बारीकियां सीखी और अपने अनुभव के आधार पर अपना व्यवसाय शुरू किया जिसे आपने अपने अथक परिश्रम से आगे बढाया| आज आपकी भवन निर्माण कम्पनी “राठौर ग्रुप ऑफ़ कम्पनी” मुंबई, जिसके आप चेयरमैन है का 400 करोड़ रूपये का सालाना कारोबार है| जो आपकी ईमानदारी व कठिन परिश्रम और अथक प्रयासों का परिणाम है| आपने जीवन में कई उतार चढाव आये पर आपने उन हर कठिनाइयों का सामना किया और अपने हर उद्देश्य को न केवल सफलतापूर्वक पुरा किया बल्कि हर क्षेत्र में अपेक्षित सफलता प्राप्त की| आपके जीवन में ऐसी कई घटनाएँ घटी जिनका विवरण यहाँ दिया जाना संभव नहीं|

अपने व्यवसाय में बुलंदियां छूने के साथ ही आप अपने सामाजिक सरोकार को कभी नहीं भूले| और आप सामाजिक कार्यों व संस्थाओं से सतत जुड़े रहे|

वर्तमान में आप मुंबई में राजपूत सेवा परिषद व् राजपूत परिषद के अध्यक्ष हैं साथ ही कई अन्य  सामाजिक संस्थाओं से भी जुड़े है|आपकी उपलब्धियों को देखते हुए प्रवासी राजस्थानियों की जीवनी की पुस्तक ‘Jewels of Rajasthan in the World’ में भी आपकी जीवनी सम्मिलित  की गयी है जो अपने आप में एक उपलब्धि है । ज्ञात हो इस पुस्तक में राजस्थान के उन प्रवासियों की जीवनी को सम्मिलित किया  गया है जिन्होंने विश्वस्तर पर अपनी अथक लगन, परिश्रम और ईमानदारी से अलग अलग क्षेत्रों में सफलता के ऊँचे आयाम छूकर राजस्थान सहित पुरे देश का नाम रोशन कर अपनी योग्यता की छाप छोड़ी है।

आपने कई स्कूल व् विद्यालयों को धन राशी दान की ताकि बच्चों की बेसिक पढाई अच्छे से हो सके … समाज सेवा के लिए आपको कई सम्मानों से सम्मानित किया गया है जिनमें  मुख्य रूप से  भामाशाह अवार्ड,  समाज सेवा रत्न गौरव आदि है| आपने विधवा विवाह और विधवाओं के लिए जरुरी आर्थिक व चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने के क्षेत्र में भी काफी काम किया है|

आपका मानना है कि- हर व्यक्ति यदि सही दिशा एवं ध्येय को लेकर कार्य करे तो सफलता अपने आप मिलेगी| इसके अलावा भी आपसे माटी ke  लाल .कॉम वेब साईट से उनकी समाज के कई जवलंत विषयों पर बातचीत हुई जो यहाँ प्रस्तुत है -

प्रश्न – राजपूत युवाओ का भविष्य कहा  देखते ह आप ?

उत्तर – आज के राजपूत युवा अन्य युवाओं के मुकाबले में अपने भविष्य के लिए उतने जागरूक नहीं है जितना उनको होना चाहिए| अत: आज के इस आरक्षित एवं सामाजिक परिवर्तन युग में राजपूत समाज के युवाओं का भविष्य तनिक अंधकार में है| अत: इस बिंदु पर चिंतन की गंभीर आवश्यकता है|

प्रश्न – आप जेसे बड़े ओद्योगिक घराने प्राय एक  बड़ी धन राशि दान में दे दिया करते हैं ,क्या आपको नहीं लगता है की दान में देने की बजाय एक बड़ी धन राशि को रोजगार -सृजन में उपयोग किया जाये ताकि जिन लोगो की भलाई या उत्थान को ध्यान में रख कर ये धन राशि दान में दी गई हैं ,उनके लिए एक  नियमित आय का साधन तैयार हो सके |

क्योकि हमें लगता हैं दान में दी गई धन राशि  का उपयोग उन उद्धेश्यो के लिए नहीं किया जाता हे जिनके निमित्त धन राशि दी गई थी |

उत्तर – जी हाँ ! ऐसा किया जाना चाहिए| लेकिन इसके लिए एक कर्त्तव्य परायण व्यक्ति या संस्था को आगे आकर बीड़ा उठाना होगा एवं एक पहल करनी होगी |

प्रश्न – राजपूत समाज की महिलाओ के और उनके आर्थिक उत्थान के लिए क्या योजनाये हैं ?

उतर- कई योजनाएं है हमारे संस्थान रा.रा.प.(मुंबई) की और हमारा संस्थान इस क्षेत्र में काफी प्रयासरत है| साथ ही महिला स्वाबलंबन, आर्थिक उत्थान हेतु हमें मिलकर कुछ ठोस आधार के साथ योजनाएं बनाकर कार्य करना होगा|

प्रश्न – राजस्थान प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण हैं और वहा गुजरात और महाराष्ट्र की तरह उधोगो की सम्भावना प्रबल  हे।

क्या आप की कोई नीति  हे राजस्थान में नये उधोगो के लिए ? 

उत्तर- विपरीत परिस्थितियों में किसी कार्य को पूर्ण करना ही सच्चे रूप में सही सफलता कहलाती है| अत: अगर राजस्थान में उद्योग क्षेत्र में सम्भावना की बात की जाय तो इसमें प्रबल सम्भावना है| और कई उदाहरण हमारे सामने भी है|

प्रश्न- समाज में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आपकी नजर मैं क्या क्या कदम उठाए जा सकते हैं ? 

उत्तर- कई कदम उठाये जा सकते है जैसे कि एक बालिका छात्रावास खीमेला (विधावाड़ी के समीप) बनाया गया है उसी को आगे बढ़ाकर उसमें विद्यालय, महाविद्यालय एवं अन्य बालिका उत्थान शिक्षा हेतु योजनाएं व गतिविधियां चलाई जा सकती है| साथ ही जालौर में प्रस्तावित बालिका विद्यालय, छात्रावास एवं अन्य योजनाओं हेतु बहुत बड़ा क्षेत्र कार्य हेतु तैयार है|

प्रश्न- राजपूत समाज में शादी ब्याह जेसे सामाजिक समारोह में खुले आम शराब परोसी जाती हें या मांग की जाती हैं .. इस सन्दर्भ में आपकी क्या राय  हैं ?

समाज में फैली दहेज़ / टिका प्रथा जैसी कुरीतियों से केसे निजात पाई जा सकती ?

उत्तर- जी हाँ ! शराब पूर्ण रूप से शादी ब्याह में प्रतिबंधित की जानी चाहिए| दहेज प्रथा, टीका प्रथा जैसी कुरुतियों पर दृढ निश्चय एवं आपसी विचार कर्तव्य निष्ठा से निजात पाई जा सकती है| एवं हर राजपूत अगर अपनी बहु को बेटी के रूप में स्वीकार करे तो इन कुरुतियों से निजात पाने में हमें अपेक्षित सफलता मिल सकती है|

प्रश्न- क्या सामूहिक विवाह सम्मेलन इन कुप्रथावो को रोकने का बेहतर विकल्प बन सकते हैं ? अगर हाँ तो आप भविष्य में सामूहिक विवाह की पहल करेंगे? 

उत्तर – सामूहिक विवाह का मैं पूर्ण पक्षधर हूँ एवं मैं इसकी शुरुआत से ही पहल करता आया हूँ| मैं अपनी और अपने संगठन रा.रा.प.(मु.) की और से इस क्षेत्र में हर कार्य और हर सहयोग के लिए तैयार हूँ|

हमारा संगठन एक मैरिज ब्यूरो की स्थापना का उद्देश्य लिए है और इसके लिए हम आपसे भी सहयोग एवं सहायता की आशा रखते है|

प्रश्न- आज के बदले हुए समय में आप राजपूत समाज के युवाओं से  क्या अपेक्षा रखते हैं?

उत्तर- आज के इस बदले हुए युग में हर राजपूत युवा को राजनैतिक, सामाजिक एवं आर्थिक क्षेत्र में अपना परचम अपने सामर्थ्य के साथ लहराना चाहिए| शिक्षा, नौकरी एवं व्यवसाय के क्षेत्र में हर युवा से ये अपील करता हूँ कि- “वो हर अपने से छोटे को इस क्षेत्र में मार्गदर्शन दे|”

प्रश्न – हमारी वेब साईट के लिए आप क्या संदेश देना चाहेंगे?

उत्तर- राजपूत समाज को अपने इतिहास एवं कर्तव्य परायणता के अनुरूप हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति एक ऐसे रूप में दर्शानी चाहिए कि हर आमजन की जुबां पर एक अच्छी चर्चा का कारण बने और इसके लिए आप अपनी वेब साईट के माध्यम से ऐसी घटनाएँ, उदाहरण और योजनाओं का आधार प्रदान करें जो हर राजपूत युवा को इसके बारे में सोचने को मजबूर करें| समाज के ऐसे सफल व्यक्तियों के उदाहरणों से युवा शक्ति को परिचित कराएं जिनसे आज का युवा प्रेरणा लेकर अपने जीवन में आगे बढे|

 

Astt. Commandant Rajya Shree Rathore, Pilot ,Indian Coast Guard

RajyShree Presidient House

Rajya Shree Rathore, Astt. Commandant in Indian Coast Guard as Pilot at Kochi , Kerala

Birth – 11 Feb 1985

Birth Place – Etawa Lakha District _ Nagour Rajasthan

Grand Father – Ancient Mariner of The desert Shri Sangram Singh Ex CPO Indian Navy (Joined Royal Indian Navy in 1945 – Retired in 1973)

Father – Magh Singh Rathore Social Worker , Consultant – JOG SANJOG – An Exclusive Rajput Matrimonial Service

Mother – Smt Sugan Kanwar Shekhawat D/ O Thakur Shri Ram Singh ji Shekhawat of KOLWA Dist Sikar Rajasthan

Brother Sister – Elder Sister Mrs Deepika Rathore  Lecturer Rajsthan Education Services , Elder Brtoher Shyam Pratap Singh Rathore – journalist

Primary Education – Mayur Public School – Gachhipura Dist Nagour Rajasthan

Schooling -  Sr Secondary (PCMB)from Jawahar Navodaya Vidhyalaya  Kuchamansity Nagour Raj

Selected through competition and studied under 100 % Scholarship

College Education -  B Sc Maths from Kanoria College, Jaipur

NCC  – Sr Under Officer  in Ist Raj Bn. Best Turnout Cadet

Worked  as Astt Security Officer in Jet Airways and Oman Air Jaipur

Professional Qualification -  Commercial Pilot License from Air- D Minnesota State  USA

At Present -  Astt. Commandant in Indian Coast Guard as Pilot at Kochi , Kerala

Married to  Lieutenant Vikram Singh Chhonkar {Logistic Officer in Indian Navy }of Kurthala Dist Palwal Haryana

Achievements = First and only female Pilot from Rajasthan in Indian Coast Guard

Honored at Rasthrapati Bhawan by Her Excellency  Smt Pratibha Devi Singh Patil Ji

Awards  -  Veer var Rao Amar Singh Puruskar By HH Jodhpur Shri Gaj Singh ji and Governor of Rajasthan HE S K Singh ji

Rajasthan Gaurav – Sanskriti Sanstha  by HE Governaor and Chief Justice Anshuman Singh ji in presence of Mayor Jaipur Jyoti Khandelwal and ministers of Rajasthan Cabinet

Vivekanand Puruskar at University of Rajsthan by Justice Jain , VC and other guests

Honored at Republic Day Pared at district Head Quarter at Nagour by Minister Incharge Mr Yunus Khan and Collector and Superintendent of Police

Samaj Gaurav by Shri Kalyan Singh Kalvi Smriti Sansthan and Shri Rajput Karni Sena by MP Raja Sanjay Singh Amethi, Kaptan Singh Solanki and Ex Army Chief Gen V K Singh ji

Phone No –

Husband – Lieutenant Vikram Singh –  09496836604

Father Magh Singh  – 09828164177

 

Dr L.S.Rathore : Director General of Meteorology, India

Dr.L.S.Rathore

Dr L.S.Rathore is Director General of Meteorology, India Meteorological Department, Ministry of Earth Sciences New Delhi. He is former Vice President of Commission for Agriculture Meteorology (CAgM), World Meteorological Organization (WMO) and presently on its management board. He has played a key role in development of Integrated Agro-Meteorological Service in the country. He participated in IIIrd Indian Scientific expedition to Antarctica in 1983-84 which set up first Indian base station on the south polar region.

Born on 4th July 1954 at village sukhwasi, District-Nagaur, Rajasthan, to Shri Chain Singh Ji and mother Smt. Har Kunwar.

EDUCATIONAL:

• Primary education; at village in rural environment,
• Secondary education; Chopasani school, Jodhpur,
• Bachelor degree; Bhupal Nobles College, Udaipur, (first class),
• Master degree; Rajasthan College of Agriculture, Udaipur, (first position),
• Doctorate degree; Rajasthan College of Agriculture, Udaipur

PROFESSIONAL:

• 1980; Joined Indian Meteorological Services as Meteorologist with first rank in UPSC exam,
• 1983-84; Participated in Indian Scientific expedition to Antarctica as leader of Meteorological team and set up India’s first permanent station ‘Dakshin Gangotri’,
• 1989; Joined Department of Science & Technology as Principal Scientific Officer,
• 1994; Selected as Director in Ministry of Science & Technology,
• 2000; Promoted as Advisor in Ministry of Science & Technology,
• 2006; Elected as Vice-President, Commission of Agriculture Meteorology (CAgM), World Meteorological Organization (WMO), United Nations,
• 2007; Appointed as Additional Director General of Meteorology, India Meteorological Department, Ministry of Earth Sciences,
• 2008; Conferred Fellowship by Indian Meteorological Society for distinguished work in promoting meteorological service in country,
• 2009; Elected as President Indian Meteorological Society,
• 2011; Elected as President Association of Agrometeorologists,
• 2012; Selected as Director General of Meteorology, India Meteorological Department,

After obtaining his PhD in Soil Science (Agriculture) from University of Udaipur, he joined IMD, in the year 1980, as Meteorologist Grade II. At Agriculture Meteorology Division, IMD, Pune, he served as Meteorologist-in-Charge of Evapotranspiration, Evaporation, Agrometeorological Research and Desert Locust Meteorology units. Besides carrying out research and developmental work he managed all India net work of stations on above mentioned areas.

He became Principal Scientific Officer in Department of Science & Technology, Government of India, in the year 1989. Subsequently, he became Director and was appointed as Head, Application Division of National Centre for Medium Range Weather Forecasting (NCMRWF). As Head of Division, he played key role to set up medium range weather forecast based agro-meteorological advisory service (AAS). The collaborative service, functioning at agro-climatic zone scale, was made operational under his guidance. He became Advisor/Scientist-G in the year 2000 and continued to work on application of weather forecast in various sectors, primarily the agriculture.

He was appointed as Additional Director General & Head, Agriculture Meteorology Division of India Meteorological Department in 2007 and played a key role in development of district level Agro-meteorological Advisory service, which was put in operation by IMD from monsoon 2008. Under this, a network of 130 Agro Meteorological Field Units (AMFUs) was set up in the country. The service is rendered in close collaboration with Indian Council of Agricultural Research, State Agricultural Universities, State Agricultural Departments, NGOs etc.

He has significantly contributed through working on various committees. He was Chairman of the committee constituted by Ministry of Earth Sciences to reorganize the AAS involving all the stakeholders. He advises Crop Weather Watch Group, Department of Agriculture & Cooperation, Government of India, on medium range weather forecast and its application in agriculture.

He has over three decades of experience of conducting and guiding R&D work in the area of Soil Science, Agriculture Meteorology and Weather Forecasting. He has published about 100 research papers. Beside these, he has co-edited seven books and written chapters in 24 books.

He has been recognized by Indian Institute of Technology, Delhi Guru Jambheshwar University, Hisar and Andhra University, Waltair to guide extra mural research and supervised four students for award of PhD degree. He is on panel of Advisory Board/examiner for Post Graduate students of Indian Institute of Technology, Delhi, Banares Hindu University, Varanasi, Indian Agriculture Research Institute, New Delhi, Andhra University, Guru Jambheshwar University, Hisar, Mahatma Phule Krishi Vidyapeeth, Rahuri & Indira Gandhi Agricultural University, Raipur.

He has organized a number of trainings and taught Agriculture Meteorology, weather forecasting and its application in farm management. Also, he has served as guest lecturer/ resource person in a number of training programs, workshops, symposia, SERC Schools, Winter/Summer Schools of ICAR etc.

Beside above, served on many committees, including governing councils of institutions, scientific societies;
• Chairman, Governing Council, SAARC Meteorological Research Centre, Dhaka,
• Member, Management Group CAgM, WMO, United Nations,
• Member, Brahmputra Board,
• Member, Governing Council, Indian National Centre for Ocean Information Service, Hyderabad
• Chief Editor, Mausam (Indian Journal of Meteorology)
• Chief Editor Vayu Mandal (Journal of Indian Meteorological Society)
• Guest editor of many scientific journals including, Defense Science Journal, Natural Hazards, Journal of Agrometeorology, International Journal of Climatology, Climatic Change.
• Served a large number of national and international committees,
• Member, Earth System Sciences Organisation Council,
• Member, Governing Council for Indian Institute of Tropical Meteorology,
• Member, Governing Council of Indian Institute of Geomagnetism,
• Member, Scientific Council of National Centre for Medium Range Weather Forecasting,
• Member, International Advisory Panel, Earth System Science Organization,
• Member, Scientific Advisory Council, MS Swaminathan Research Foundation, Chennai,
• Set-up medium range weather forecast based agriculture advisory service system in country which is bestowed up on many awards and appreciations,
• Worked as Visiting Scientist at University of Nebraska, Lincoln, Nebraska, USA,
• Chairman, Positional Astronomy Centre, Kolkata
• Chairman, Technical Monitoring & Evaluation Committee for programs under MULTI HAZARD EARLY WARNING SUPPORT INTERFACES,
• Served on many recruitment committees for Government of India and Universities including IITs,
• Visited about two dozen countries for professional work. Also, he was visiting scientist at University of Nebraska, USA,
• Steered/participated many scientific programs related to application of meteorology in agriculture,
SOCIAL SECTOR:
• Past Secretary General, Rajputana Samaaj, New Delhi,
• Past President Shramdeep Sehkari Awas Samiti,
• President Kendriya Mantralaya Welfare Housing Society.

Rajnigandha Shekhawat

ss

बोलीवुड संगीत की दुनियां में गायक के तौर पर रजनीगंधा शेखावत एक जाना पहचाना नाम है| रजनीगंधा शेखावत ने राजस्थान के लोक गीतों को गाकर भी कई म्यूजिक एल्बम बनाये है| आप शेखावाटी के मलसीसर  ठिकाने के ठाकुर साहब की बाईसा है | यहाँ प्रस्तुत है माटी के लाल .कॉम वेब साईट की रजनीगंधा शेखावत के साथ बातचीत जिसे पढ़ आप रजनीगंधा शेखावत के बारे में ज्यादा जा सकतें है -

प्रश्न :- अपने बचपन एवम अपने परिवार के बारे मे बताए .

उत्तर :- Khamaghani.

I am a Rajput from Shekhawati, hence a Shekhawat. I belong to 1 of the erstwhile aristocratic family of Rajasthan. My forefathers were defenders and ruler of the area called Malsisar in Shekhawati. Malsisar falls in the Jhunjhanu district. My father is the current Thakur Sahab of Malsisar. My childhood was spent in our Haveli located in Jaipur. I grew up in a household full of relatives, servants, their families…

I have a very strong man for a father, his name is Dr Bhawani Singh and every ounce of pride that I exude has come from him to me. My father topped the university in his student days and has over 100 debating prizes to his credit, those lovely old trophies share a proud place in our drawing room at home now, at our insistence. He has written nearly 19 books to date.  My late mother was a Rawalot Bhati from Jaisalmer, whose family shifted to Uttar Pradesh a few centuries ago. She studied in Lady Irwin College in Delhi before she married my father, came to Jaipur and turned herself into a typical Thakurani from Rajasthan! I have a brother who lives in Jaipur with his own family, and an elder sister, who got married and went to Lucknow. She raises her family in Lucknow and looks after her farm near Nainitaal. My Jija (elder sister) is a wonderful artist, a painter, who, post school, was offered scholarships from various art colleges of India but chose to stay back in Jaipur as we are from a very orthodox and traditional Rajput family and daughters were not allowed to go out unescorted. She managed to bag a national award in painting while in college and she paints in her spare time.

प्रश्न:- प्रारम्भिक शिक्षा कहा से हुई?

उतर :- I studied for 12 years in India’s first public school for girls, the Maharani Gayatri Devi Girls Public School, better known as MGD school. The school was started by the youngest Maharani of Jaipur, the then Maharani Gayatri Devi, in 1943, so that the Rajput girls from purdah families could get world class education. So she got a principal from UK, Miss Lutter. Hence I studied in a school that is seeped in culture and heritage of Rajasthan while our teaching standards have always been as good as anywhere in the world. I also started studying classical music first from Rajasthan Sangeet Sansthan, then took private lessons from Pt Lakshman Bhatt Tailang, followed by more formal lessons from Maharaja Sawai Man Singh Sangeet Vidyalaya.

 प्रश्न :- आपने शिक्षा कहा  तक प्राप्त की ?

उत्तर :- I did my entire schooling from MGD School Jaipur, then my bachelors in Commerce from Maharani College Jaipur. I simultaneously also studied Hindustani classical music first from Rajasthan Sangeet Sansthan, then took private lessons from Pt Lakshman Bhatt Tailang, followed by more formal lessons from Maharaja Sawai Man Singh Sangeet Vidyalaya. Once I moved to Mumbai I started learning classical music on and off from Pt Rattan Mohan Sharma, who is Pt Jasraj’s nephew and chief disciple. I am back to school now and am perusing my Vishaarad and MA in Music from SNDT University in Mumbai while training in Pt Jasraj school of music foundation in Mumbai.

प्रश्न :- राजपूत समाज मे आज एक  उभरता नाम हे आप …

उत्तर :- I have recently started getting a lot of encouragement from the Rajputs in Rajasthan. I am glad that the music I do, which I try to keep as pure as possible, is getting appreciation from our community.

प्रश्न :- आप के लिए ये सफर कैसा  रहा ? पारिवारिक सहयोग रहा ?

उत्तर :- Its not been easy, I have a lot to achieve so the journey continues. My parents, like any normal Rajput parents, were not open to allowing a daughter to sing. But over the years they saw me getting prizes, then felicitations, they attended my concerts. I think they were worried that I will go out of Rajasthan and turn into something strange. They now realize I am more of a Rajasthani since I moved to Mumbai to pursue my dream and they are happy and proud of me now.

प्रश्न :- विरोधियो को जवाब किस तरह से  देते हैं आप ?

उत्तर :- विरोधी तो कोई नहीं है और अगर कोई होगा भी तो मैंने उसे कभी नोटिस करना जरुरी नहीं समझा| मेरे लिए सिर्फ मेरा परिवार महत्त्वपूर्ण है उसके अलावा कौन क्या बोलता है ? सोचता है ? वो उनकी प्रॉब्लम|

प्रश्न :- राजस्थानी लोक संगीत को देश दुनिया मैं एक   पहचान दिला रही हैं आप क्या प्रतिक्रिया मिलती हैं श्रोताओं  से ?

उत्तर :- मेरे एल्बम भी लोग अलग-अलग देश में डिमांड करते है जिन्हें हमारी भाषा तक नहीं आती, तो लगता है पसंद ही करते होंगे मेरे गानों को |

प्रश्न :- राजस्थानी लोक संगीत को पहचान दिलाने का श्रेय इला अरुण को जाता हैं ,पर उनपे ये आरोप भी कई बार लगे हे की उन्होंने लोक संगीत की आत्मा को मारा हैं . इस में आप क्या राय रखती हैं ?

उत्तर :- मैं अपने साथ के लोगों के बारे में शायद फिर भी टिप्पणी करूँ पर इला जी मुझसे इतनी वरिष्ठ है कि मैं कुछ भी नहीं कहना चाहूंगी उनके बारे में |

प्रश्न :- आजकल के युवाओ का झुकाव बोलीवूड के रिमिक्स गानों की तरफ ज्यादा हैं , इसे मैं लोक संगीत को बचा पाना कितना मुश्किल हैं ?

उतर :- बोलीवुड आज पॉपुलर नहीं हुआ ! पिछले 75 साल से सबसे ज्यादा सुनने वाले गाने बोलीवुड से ही निकलते है| इसलिए आज की युवा पीढ़ी को दोष देना बिल्कुल गलत है| हमारे बड़े भी बोलीवुड सुनते थे और हमारे बच्चे भी बोलीवुड सुनेंगे और उसमें कोई बुराई नहीं| लोकगीत बोलीवुड में बहुत इस्तेमाल हुए है| यूपी, बिहार, राजस्थान, मध्यप्रदेश, हिमाचल, कश्मीर ऐसा कोई प्रान्त नहीं है जिसके लोक गीत बोलीवुड में इस्तेमाल नहीं हुए हों| मेरा एल्बम “बन्ना रे” मैंने इसीलिए बनाया| उस में मैंने कुछ वो गाने चुनके गायें है को कि बोलीवुड आदि में इस्तेमाल हो चुकें है| बस मैंने उन्हें जैसे राजस्थान में ओरिजनली गाते है वैसे गाया है जिससे लोगों को पता तो चले कि ओरिजनल गाने कौन से है| बन्ना रे की टेग लाइक है “Songs that inspired Bollywood”

प्रश्न :- आपको भी इन से पर्तिस्पर्धा मिलती हैं , या लोक संगीत से भी लोग आज उतना ही जुड़ना पसंद करते हैं जितना की रिमिक्स से ?

उत्तर :- गाना अगर सुनने में ज्यादा से ज्यादा लोगों को ख़ुशी देता है तो वो गाना सही है| मैं सब तरह के गाने गाना पसंद करती हूँ पर क्योंकि राजस्थान से हूँ तो लोक संगीत मुझसे ज्यादा आसान गया जाता है| वैसे भी अगर कोई गाना रिमिक्स होकर चल रहा है उसका यही मतलब है कि वो पॉपुलर है और उसकी मांग है| रिमिक्स में क्या बुराई है? अगर राइट्स लेकर किया गया है तो बहुत अच्छी बात है कि एक पुराने गाने को एक और ऑडियंस, एक और जनरेशन सुनेगी| मैंने एक शमशाद बेगम का गाना “सैंया दिल में आना रे” का रिमिक्स गाया था और वो बहुत पॉपुलर भी हुआ था|

प्रश्न :- राजपूत समाज में बालिका शिक्षा का स्तर बहुत  ही निम्न हे आज भी, ठीक वही कई बलिकवाओ ने अलग अलग क्षेत्रो में अपना परचम फहराया हैं . इस अंतर को आप केसे देखते हैं ?

उत्तर :- लड़कियों और लड़कों में भेदभाव करना पुरे देश की कुप्रथा है, लड़कियों को अपने घर से  ही discrimination face करना पड़ता है और वो फिर भी ज्यादा मेहनत करती है और लड़कों से आगे निकल रही है| ये बहुत साहस की बात है और मुझे ऐसी लड़कियों पर गर्व है| जब तक हमारे अभिभावक ये बदलाव खत्म नहीं करेंगे तब तक कुछ नहीं हो सकता| बदलाव आना चाहिए और आ भी रहा है|

प्रश्न :- एक  संदेश राजपूत बच्चियों के लिए ..

उत्तर :- I strongly believe that one has to take charge of one’s life, ones destiny and reach out for ones dreams. Excuses don’t make for great nostalgic stories, it’s the stories of victory that draw people to you. None of us have a perfect life or a perfect spring board to leap to success from, but constantly blaming others or circumstances for one’s failure is a waste of time. Sirf bahane list karte rehne se kuch nahi hoga, aage badho, face life and work hard.

Eventually everyone loves a successful person. So one has to grab life and make the universe work for you! I read it somewhere, that if you think you can, or you think you cannot, you are right! Most of the obstacles are in our own heads, not out there in the world! So go out there, play the match, and play to win.

प्रश्न :- हमारी वेबसाइट के लिए आपके शब्द

उतर :- आपको बहुत बहुत बधाई ! आगे बढ़ो, सबको साथ लेते हुए|

खम्मा घणी

Khamaghani.